
बैंक वैल्यूएशन वास्तव में कैसे किया जाता है?
Bank Valuation की पूरी Process – कौन-कौन से Documents चाहिए, बैंक क्या Expect करता है, कौन-सा Valuation Approach अपनाना चाहिए, Site Visit से पहले, दौरान और बाद में क्या Check करना चाहिए तथा Bank Valuation करते समय किन Precautions का ध्यान रखना चाहिए
BY: ER. SUNDEEP BANSAL
आज के समय में Bank Valuation केवल किसी Property की Price बताने का कार्य नहीं रह गया है। यह एक Professional Opinion (विशेषज्ञ राय) होती है, जिसके आधार पर बैंक लाखों और करोड़ों रुपये का Loan Sanction करता है।
जब कोई बैंक किसी Property के बदले Loan देता है, तो वह सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यदि भविष्य में Borrower Loan वापस नहीं करता, तो बैंक उस Property को बेचकर अपना पैसा Recover कर सके।
यहीं पर Valuer की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शुरू होती है।
एक Professional Valuer की Report केवल Property की कीमत नहीं बताती, बल्कि यह भी बताती है कि—
- Property वास्तव में मौजूद है या नहीं।
- Property Legal Documents से Match करती है या नहीं।
- Property Market में आसानी से बिक सकती है या नहीं।
- Property पर कोई Risk तो नहीं है।
- बैंक को Loan देना सुरक्षित होगा या नहीं।
आज RBI, Banks, Internal Auditors, CVC, CBI, ED, Courts तथा अन्य Regulatory Authorities द्वारा Valuation Reports की पहले से कहीं अधिक गहराई से जांच की जाती है। इसलिए प्रत्येक Engineer एवं Valuer को केवल Value निकालना ही नहीं, बल्कि पूरी Valuation Process को Professional तरीके से करना आना चाहिए।
इस लेख में हम Bank Valuation की पूरी Practical Process को Step-by-Step समझेंगे।
1. Bank Valuation का मुख्य उद्देश्य (Purpose of Bank Valuation)
बहुत से नए Engineers और Valuers यह समझते हैं कि Bank Valuation का उद्देश्य केवल Property की Market Value बताना होता है।
लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है।
Bank Valuation का मुख्य उद्देश्य बैंक के लिए Security (Collateral) की Strength को Assess करना होता है।
जब कोई व्यक्ति Home Loan, Business Loan, Cash Credit, Overdraft, Mortgage Loan या अन्य Loan के लिए Property गिरवी रखता है, तो बैंक यह जानना चाहता है कि—
✔ Property की सही Market Value क्या है?
✔ यदि Property बेचनी पड़े तो कितनी कीमत मिल सकती है?
✔ यदि Forced Sale करनी पड़े तो कितनी Recovery होगी?
✔ Property Legal और Physical रूप से सही है या नहीं?
✔ Property Mortgage के लिए Suitable है या नहीं?
✔ भविष्य में इस Property को बेचने में कोई कठिनाई तो नहीं आएगी?
इस प्रकार Valuation केवल कीमत (Price) बताने का कार्य नहीं बल्कि Risk Assessment का कार्य भी है।
2. बैंक वास्तव में Valuer से क्या Expect करता है?
कई Engineers यह सोचते हैं कि बैंक केवल एक Figure चाहता है।
लेकिन वास्तव में बैंक एक Professional और Reliable Report चाहता है।
एक अच्छी Valuation Report में निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर होना चाहिए—
क्या Property वास्तव में Exist करती है?
क्या Property वही है जो Documents में दिखाई गई है?
क्या Owner द्वारा दिखाई गई Property और Documents एक-दूसरे से Match करते हैं?
क्या Construction Approved है?
क्या Property Marketable है?
क्या भविष्य में बैंक आसानी से इसे बेच सकता है?
क्या Property की Value उचित आधार (Scientific Basis) पर निकाली गई है?
क्या Property में कोई Hidden Risk है?
क्या बैंक का Loan सुरक्षित रहेगा?
इसलिए Valuer केवल Property की कीमत नहीं बताता बल्कि बैंक के लिए एक Independent Technical Expert के रूप में कार्य करता है।
3. Bank Valuation शुरू करने से पहले कौन-कौन से Documents लेने चाहिए?
नए Valuers की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि वे बिना Documents देखे सीधे Site Visit पर चले जाते हैं।
यह Practice बिल्कुल सही नहीं है।
Site Visit करने से पहले उपलब्ध Documents का अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है।
(A) Ownership Documents (मालिकाना दस्तावेज)
सबसे पहले यह देखना चाहिए कि Property का Ownership किस आधार पर है।
सामान्यतः निम्न Documents देखे जाते हैं—
- Sale Deed (बिक्री विलेख)
- Conveyance Deed
- Gift Deed (उपहार विलेख)
- Partition Deed (बंटवारा)
- Lease Deed
- Allotment Letter
- Possession Letter
इन Documents से Property का Ownership तथा Property की पहचान समझने में सहायता मिलती है।
(B) Revenue Records (राजस्व अभिलेख)
विशेषकर Agricultural Land एवं ग्रामीण क्षेत्रों की Property में निम्न Documents महत्वपूर्ण होते हैं—
- Jamabandi
- Mutation (Intkal)
- Khasra Number
- Khatauni
- Record of Rights
- Patta (जहाँ लागू हो)
इन Records से Land की पहचान तथा Revenue Record की स्थिति स्पष्ट होती है।
(C) Municipal Documents (नगर निगम / नगर परिषद के दस्तावेज)
Urban Areas में निम्न Documents अवश्य देखने चाहिए—
- Approved Building Plan
- Sanctioned Map
- Completion Certificate
- Occupancy Certificate
- Property Tax Receipt
- House Tax Record
इनसे यह पता चलता है कि Building नियमों के अनुसार बनी है या नहीं।
(D) Development Authority Documents
यदि Property किसी Development Authority या Improvement Trust के अंतर्गत आती है, तो निम्न Documents देखने चाहिए—
- Approved Layout Plan
- Zoning Certificate
- Land Use Certificate
- Change of Land Use (CLU), यदि लागू हो।
(E) Property Identification Documents
Property की सही पहचान सबसे महत्वपूर्ण होती है।
इसके लिए निम्न Documents उपयोगी होते हैं—
- Site Plan
- Location Plan
- Survey Number
- Plot Number
- GPS Coordinates (यदि उपलब्ध हों)
यदि Documents में दी गई Property और Site पर दिखाई गई Property अलग-अलग हो, तो इसे तुरंत बैंक के Notice में लाना चाहिए।
(F) अन्य आवश्यक Documents
इसके अतिरिक्त निम्न Documents भी उपलब्ध होने पर अवश्य देखने चाहिए—
- Previous Valuation Report
- Lease Agreement
- Rent Agreement
- Electricity Bill
- Water Bill
- Encumbrance Details (यदि बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जाए)
इन Documents से Property की वर्तमान स्थिति और उपयोग (Usage) को समझने में सहायता मिलती है।
महत्वपूर्ण Professional Advice
एक अच्छे Bank Valuer की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि उसने Property की कितनी Value निकाली, बल्कि इस बात से होती है कि उसने Documents की कितनी गहराई से जांच (Due Diligence) की।
याद रखें—
“Documents देखे बिना Site Visit करना उतना ही खतरनाक है, जितना Prescription पढ़े बिना किसी मरीज का इलाज करना।”
एक Professional Valuer हमेशा पहले Documents का अध्ययन करता है, उसके बाद Site Visit करता है, और अंत में सभी तथ्यों का मिलान (Correlation) करके Valuation Report तैयार करता है।

VIEW FULL VIDEO
Published by: Council of Engineers and Valuers (CEV)

KEY ASPECTS RELATING TO VALUERS




