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FROM COURTROOMS TO VALUATION REPORTS: HOW THE SUPREME COURT’S RERA RULING IS CHANGING THE GAME FOR BANKS AND REGISTERED VALUERS

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: RERA या Consumer Forum – एक ही विवाद के लिए दो मंचों का विकल्प नहीं

Homebuyers, Builders, Valuers एवं Real Estate Professionals के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन

भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में लंबे समय से यह प्रश्न चर्चा का विषय रहा है कि क्या कोई Homebuyer एक ही विवाद के संबंध में पहले रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के समक्ष शिकायत दर्ज कराने के बाद उसी मामले को उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) में भी ले जा सकता है? इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय देते हुए कानून की स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का प्रभाव केवल Homebuyers और Builders तक ही सीमित नहीं है, बल्कि Registered Valuers, Insolvency Professionals, Financial Institutions, Legal Practitioners तथा Real Estate Consultants के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह निर्णय रियल एस्टेट विवादों के निस्तारण की प्रक्रिया को नई दिशा प्रदान करता है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला M/s Kabra & Associates v. Rekha Rajkumar Hemdev & Others से संबंधित है।

प्रकरण में कुछ Homebuyers ने अपने फ्लैट से जुड़े विवादों और कथित अनियमितताओं के संबंध में महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी तथा विभिन्न प्रकार की राहतों की मांग की थी। RERA के समक्ष कार्यवाही प्रारम्भ होने के पश्चात उक्त Homebuyers ने अपनी शिकायत वापस लेने का निर्णय लिया और तत्पश्चात उसी विवाद तथा समान कारण-ए-कार्यवाही (Same Cause of Action) के आधार पर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर दिया।

NCDRC ने शिकायत को सुनवाई हेतु स्वीकार कर लिया। इसके विरुद्ध Builder ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और यह तर्क रखा कि जब शिकायतकर्ता पहले ही RERA के मंच का चयन कर चुके थे, तब उन्हें बाद में उसी विवाद के लिए उपभोक्ता आयोग में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य कानूनी प्रश्न

सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष मूल प्रश्न यह था कि—

क्या कोई Homebuyer एक बार RERA के समक्ष कार्यवाही प्रारम्भ करने के पश्चात उसी विवाद के लिए Consumer Commission में नई कार्यवाही शुरू कर सकता है?

अर्थात, क्या कानून एक ही विवाद के लिए विभिन्न मंचों के बीच चयन बदलने की अनुमति देता है?

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

माननीय न्यायमूर्ति संजय कुमार एवं न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के उपरांत Builder की अपील स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांतों को स्पष्ट किया।

1. Doctrine of Election of Remedies का सिद्धांत

न्यायालय ने कहा कि जहां किसी व्यक्ति को एक ही विवाद के संबंध में एक से अधिक वैधानिक उपाय उपलब्ध हों, वहां उसे किसी एक उपाय का चुनाव करना होता है।

यदि वादी ने स्वेच्छा से किसी एक मंच को चुन लिया है और वहां कार्यवाही प्रारम्भ कर दी है, तो बाद में वह समान विवाद के लिए दूसरे मंच का सहारा नहीं ले सकता।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून समान विवाद के लिए अनंत विकल्पों के प्रयोग की अनुमति नहीं देता, अन्यथा न्यायिक व्यवस्था में अनिश्चितता और अव्यवस्था उत्पन्न होगी।

2. समान कारण-ए-कार्यवाही पर दोहरी कार्यवाही स्वीकार्य नहीं

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि विवाद का विषय, पक्षकार तथा मांग की गई राहतें मूल रूप से समान हैं, तो RERA के समक्ष कार्यवाही प्रारम्भ करने के बाद Consumer Forum में नई कार्यवाही आरम्भ करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

न्यायालय के अनुसार, केवल शिकायत वापस ले लेने से यह अधिकार उत्पन्न नहीं हो जाता कि वही विवाद किसी अन्य मंच के समक्ष पुनः प्रस्तुत किया जाए।

3. Forum Shopping पर कड़ी टिप्पणी

न्यायालय ने Forum Shopping की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

Forum Shopping का तात्पर्य उस स्थिति से है जब कोई पक्ष अपने अनुकूल परिणाम प्राप्त करने की आशा में एक मंच से दूसरे मंच पर जाता रहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी प्रवृत्ति न्यायिक संसाधनों का दुरुपयोग है तथा इससे विभिन्न मंचों पर विरोधाभासी निर्णय आने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए कानून ऐसी कार्यवाहियों को प्रोत्साहित नहीं कर सकता।

4. न्यायिक अनुशासन और प्रक्रिया की शुचिता

निर्णय में यह भी रेखांकित किया गया कि न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि पक्षकार अपने द्वारा चुने गए वैधानिक मंच पर ही अपने अधिकारों का प्रभावी ढंग से उपयोग करें। बार-बार मंच बदलने की अनुमति न्यायिक अनुशासन के विपरीत होगी।

रियल एस्टेट सेक्टर पर संभावित प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

इस निर्णय के परिणामस्वरूप:

  • RERA और Consumer Forums के अधिकार-क्षेत्र के उपयोग में अधिक स्पष्टता आएगी।
  • समान विवादों पर समानांतर मुकदमों (Parallel Proceedings) में कमी आएगी।
  • Forum Shopping की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।
  • Builders और Homebuyers दोनों के लिए कानूनी रणनीति अधिक स्पष्ट होगी।
  • न्यायालयों एवं नियामक प्राधिकरणों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम होगा।
  • भविष्य में रियल एस्टेट विवादों के निस्तारण में यह निर्णय एक महत्वपूर्ण न्यायिक नज़ीर (Judicial Precedent) के रूप में उद्धृत किया जाएगा।

Valuers एवं Real Estate Professionals के लिए विशेष महत्व

Registered Valuers, Bankers, Insolvency Professionals तथा Real Estate Consultants के लिए यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अनेक मामलों में मूल्यांकन रिपोर्टें न्यायिक एवं अर्ध-न्यायिक मंचों के समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं। अब विवादों के उचित मंच के निर्धारण में अधिक स्पष्टता होने से कार्यवाहियों की दक्षता बढ़ेगी तथा विवाद समाधान प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी।

विशेष प्रभाव

सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि कानून द्वारा उपलब्ध विभिन्न वैधानिक मंचों का उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। एक बार किसी पक्षकार द्वारा RERA जैसे मंच का चयन कर लेने के बाद उसी विवाद को उपभोक्ता आयोग में पुनः उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह निर्णय न केवल न्यायिक अनुशासन को सुदृढ़ करता है बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, निश्चितता और विधिक स्थिरता को भी बढ़ावा देता है।

रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों—Homebuyers, Developers, Financial Institutions, Registered Valuers और विधि विशेषज्ञों—के लिए यह निर्णय भविष्य की कानूनी रणनीतियों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध होगा।


सुप्रीम कोर्ट के RERA-Consumer Forum निर्णय का व्यापक प्रभाव

Banking Sector, Registered Valuers, IBBI Valuers, Engineers, Architects एवं Real Estate Professionals के लिए एक विश्लेषण

 

1. Valuation में “Litigation Risk Discount” की अवधारणा पर प्रभाव

किसी भी रियल एस्टेट परिसंपत्ति का मूल्य केवल उसके भौतिक स्वरूप, स्थान अथवा विकास क्षमता से निर्धारित नहीं होता। उसकी Marketability और Legal Certainty भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

अब तक किसी परियोजना में निम्नलिखित स्थिति देखने को मिलती थी:

  • RERA में मुकदमे
  • Consumer Forums में मुकदमे
  • Civil Courts में मुकदमे
  • High Court में रिट याचिकाएँ

इस प्रकार की बहुस्तरीय मुकदमेबाजी (Multiple Litigation Exposure) के कारण Valuers को अक्सर Valuation Report में अतिरिक्त Risk Adjustment करना पड़ता था।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद यदि समान Cause of Action के लिए मंचों का अनावश्यक दोहराव कम होता है तो Litigation Risk Discount भी कम हो सकता है।

उदाहरण

एक Residential Project की Market Value ₹500 करोड़ है।

यदि 400 Homebuyers विभिन्न मंचों पर अलग-अलग मुकदमे चला रहे हों तो निवेशक परियोजना खरीदने से हिचकिचाएगा।

परंतु यदि विवाद एक ही वैधानिक मंच तक सीमित हो जाएं तो Marketability सुधर सकती है और Asset Value में सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


2. Banking Sector Valuers के लिए विशेष प्रभाव

बैंकों के पैनल पर कार्यरत Valuers को अब Legal Due Diligence Reports का अधिक गहन अध्ययन करना होगा।

भविष्य में निम्न प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण बनेंगे:

  • क्या परियोजना के विरुद्ध RERA में मुकदमे लंबित हैं?
  • क्या खरीदारों ने कोई सामूहिक दावा दायर किया है?
  • संभावित Compensation Exposure कितना है?
  • क्या परियोजना Completion Risk में है?

उदाहरण

यदि किसी Builder Project पर 150 RERA Complaints लंबित हैं, तो बैंक द्वारा उस परियोजना के विरुद्ध ऋण स्वीकृत करते समय Valuer को इस जोखिम को नोट करना पड़ सकता है।

ऐसी जानकारी भविष्य के Credit Decision को प्रभावित कर सकती है।


3. Security Valuation एवं Mortgage Lending पर प्रभाव

बैंक जब किसी परियोजना को ऋण देते हैं तो उनका मुख्य आधार Mortgage Security होता है।

यदि परियोजना गंभीर मुकदमेबाजी में फंस जाए तो:

  • बिक्री रुक सकती है
  • Cash Flow बाधित हो सकता है
  • Construction रुक सकता है
  • NPA बनने का जोखिम बढ़ सकता है

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय मुकदमों की संरचना को अधिक स्पष्ट बनाता है, जिससे Security Valuation अधिक विश्वसनीय हो सकती है।


4. IBBI Registered Valuers पर प्रभाव

Fair Value एवं Liquidation Value निर्धारण

IBC के अंतर्गत Real Estate Companies के Insolvency में जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

ऐसे मामलों में Registered Valuers को:

  • Fair Value
  • Liquidation Value
  • Enterprise Value

निर्धारित करनी होती है।

इन मूल्यों पर सबसे बड़ा प्रभाव Legal Encumbrances का होता है।

यदि भविष्य में समान दावों की दोहरी कार्यवाही कम होती है तो:

  • Liability Assessment अधिक यथार्थवादी होगा
  • Contingent Liabilities का अनुमान अधिक सटीक होगा
  • Resolution Applicants बेहतर बोली लगा सकेंगे

उदाहरण

एक Corporate Debtor Developer के विरुद्ध:

  • ₹50 करोड़ के RERA Claims
  • ₹50 करोड़ के समान Consumer Claims

दर्शाए गए हों।

निर्णय के बाद समान दावों की दोहरी गणना की संभावना कम होगी, जिससे Valuation अधिक वास्तविक बनेगी।


5. Liquidation Valuation पर प्रभाव

Liquidation परिस्थितियों में खरीदार सबसे पहले यह जानना चाहते हैं कि:

“इस परियोजना के साथ कितने मुकदमे जुड़े हुए हैं?”

जितना अधिक Litigation Risk होगा, उतना कम Bid Value प्राप्त होगी।

यह निर्णय Litigation Visibility बढ़ाता है, जिससे Liquidation Sale अधिक प्रभावी हो सकती है।


6. Resolution Applicants एवं Investors पर प्रभाव

निवेशक सबसे अधिक Legal Certainty को महत्व देते हैं।

अनेक Real Estate Resolution Plans इसलिए विफल हो जाते हैं क्योंकि:

  • मुकदमों की वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं होती।
  • संभावित दायित्वों का अनुमान कठिन होता है।

यह निर्णय Due Diligence को सरल बना सकता है।

उदाहरण

यदि कोई Asset Reconstruction Company (ARC) किसी Stressed Township को खरीदना चाहती है तो अब उसे यह समझने में अधिक आसानी होगी कि Homebuyers के दावे किस मंच पर लंबित हैं।


7. Engineers पर प्रभाव

Construction Delay Cases में तकनीकी रिपोर्टों का महत्व बढ़ेगा

RERA मंच पर विवादों के केन्द्र में सामान्यतः निम्न मुद्दे होते हैं:

  • Construction Delay
  • Structural Defects
  • Inferior Quality
  • Incomplete Amenities

इन सभी मामलों में Engineers की Reports निर्णायक भूमिका निभाती हैं।

उदाहरण

यदि Builder दावा करता है कि परियोजना 90% पूर्ण है जबकि खरीदार कहते हैं कि केवल 60% कार्य हुआ है, तो Chartered Engineer की रिपोर्ट RERA में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है।


8. Architects पर प्रभाव

Architects अब केवल Design Professionals नहीं रह गए हैं।

उनकी Reports का उपयोग निम्नलिखित मामलों में होता है:

  • Approved Plan Deviations
  • Unauthorized Construction
  • Occupancy Compliance
  • FAR Violations

उदाहरण

यदि Builder ने स्वीकृत योजना में दर्शाए गए Community Centre का निर्माण नहीं किया हो तो Architect का निरीक्षण रिपोर्ट खरीदारों के दावे को मजबूत कर सकती है।


9. Project Management Consultants (PMC) पर प्रभाव

PMC Reports भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती हैं क्योंकि:

  • RERA Proceedings में Project Status का प्रमाण बनती हैं।
  • Delay Attribution निर्धारित करती हैं।
  • Completion Estimates का आधार बनती हैं।

गलत या भ्रामक PMC Reports Professional Liability उत्पन्न कर सकती हैं।


10. Real Estate Consultants एवं Brokers पर प्रभाव

अब Consultants को मंच चयन संबंधी कानूनी समझ विकसित करनी होगी।

उन्हें ग्राहकों को बताना होगा:

  • RERA कब चुनना चाहिए?
  • Consumer Forum कब उपयुक्त हो सकता है?
  • एक बार मंच चुनने के बाद उसके परिणाम क्या होंगे?

गलत सलाह से Professional Negligence के आरोप उत्पन्न हो सकते हैं।


11. Professional Liability Insurance पर प्रभाव

Valuers, Engineers और Architects के विरुद्ध दावे अक्सर रियल एस्टेट विवादों से उत्पन्न होते हैं।

यदि मुकदमों का दायरा अधिक स्पष्ट होगा तो:

  • Insurance Risk Modelling बेहतर होगी।
  • Professional Indemnity Premiums का निर्धारण अधिक सटीक हो सकेगा।
  • Claim Forecasting में सुधार आएगा।

12. Asset Reconstruction Companies (ARCs) एवं NARCL पर प्रभाव

Stressed Real Estate Assets खरीदने वाली संस्थाओं के लिए यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अब:

  • Litigation Mapping आसान होगी।
  • Recovery Estimation बेहतर होगी।
  • Resolution Timeline का अनुमान अधिक सटीक होगा।

यह Stressed Asset Market को अधिक आकर्षक बना सकता है।


13. Real Estate Market Transparency पर प्रभाव

इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव संभवतः “Legal Transparency” के रूप में सामने आएगा।

जब विवादों का मंच स्पष्ट होगा:

  • Valuation अधिक विश्वसनीय होगी।
  • Financing Decisions बेहतर होंगे।
  • Investor Confidence बढ़ेगा।
  • Project Completion की संभावनाएं मजबूत होंगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय केवल Homebuyers और Builders के बीच अधिकार-क्षेत्र विवाद का समाधान नहीं है। यह भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में Risk Assessment, Asset Valuation, Banking Finance, Insolvency Resolution, Project Management और Professional Accountability की पूरी संरचना को प्रभावित करने वाला निर्णय है।

विशेष रूप से Registered Valuers, IBBI Valuers, Bankers, Engineers, Architects, Resolution Professionals तथा Investors के लिए यह निर्णय एक नए युग की शुरुआत करता है, जहां “Legal Certainty” स्वयं एक मूल्यवान परिसंपत्ति (Valuable Asset) के रूप में उभर कर सामने आती है।



Published by: Council of Engineers and Valuers (CEV)



https://youtu.be/XRCXR4aw6Bo?si=IKuK_L6VnaJnl-43

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